सजा-ए-मौत, 2 महीने में जांच और सुनवाई

सजा-ए-मौत, 2 महीने में जांच और सुनवाई

 

 

 

केंद्रीय कैबिनेट ने 12 साल तक की उम्र की बच्चियों से दुष्कर्म मामले में कानून को अधिक मजबूत बनाने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है, इस अध्यादेश में फांसी के साथ-साथ बलात्कार के लिए 7 साल की न्यूनतम सजा को बढ़ाकर 10 साल करने का प्रावधान है, इस अध्यादेश में आईपीसी, एविडेंस एक्ट, सीआरपीसी और पॉक्सो एक्ट में संशोधन की बात कही गई है,  इस संशोधन के तहत रेप के आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलने का प्रावधान है, इसमें रेप मामलों की जल्द से जल्द जांच और सुनवाई में तेजी का भी प्रावधान है, केंद्र सरकार का यह कदम कश्मीर के कठुआ में 8 साल की मासूम के गैंगरेप-हत्या और सुरत में 11 साल की बच्ची से रेप की घटनाओं के बाद आया है, इन घटनाओं से पूरा देश गुस्से में है, यह अध्यादेश अब सहमति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, सरकार ने कहा कि इस अध्यादेश के पीछे उसका मकसद है कि देश की महिलाएं, खासकर छोटी बच्चियां सुरक्षित महसूस करें! 

पहले महिलाओं से रेप की न्यूनतम सजा 7 साल सश्रम कारावास थी, इस अध्यादेश में इसे बढ़ाकर 10 साल करने का प्रावधान है, सजा को उम्रकैद तक बढ़ाया भी जा सकता है!
• 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप पर न्यूनतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है. इस सजा को आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है!
• 16 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी!
• 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप के लिए बेहद कड़ी सजा का प्रावधान है. दोषी को कम से कम 20 साल या आजीवन कारावास या फांसी की सजा दी जाएगी!
• 12 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास या मौत की सजा दी जाएगी!
• रेप मामलों की सुनवाई भी 2 महीने के अंदर पूरी कर ली जाएगी!
• रेप मामलों में अपील और अन्य सुनवाई के लिए अधिकतम छह महीने का वक्त दिया जाएगा!
• 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप या गैंगरेप के आरोपी के लिए अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं होगा!
• 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप मामले में बेल पर सुनवाई से पहले कोर्ट को पब्लिक प्रोसिक्यूटर और पीड़िता पक्ष को 15 दिन का नोटिस देना होगा!

स्पेशल डेस्क,आपकी चौपाल न्यूज़!

 

 

 

 

 

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