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साल 1998 क्यों है 'मास्टर ब्लास्टर' के लिए ख़ास | Aapki Chopal

साल 1998 क्यों है ‘मास्टर ब्लास्टर’ के लिए ख़ास

साल 1998 क्यों है ‘मास्टर ब्लास्टर’ के लिए ख़ास

 

 

हर खिलाड़ी की ज़िंदगी में एक ऐसा साल आता है जिसमें उसका प्रदर्शन इतना ज़बर्दस्त होता है कि ये साल उस खिलाड़ी की पहचान के साथ जुड़ जाता है, महिला टेनिस खिलाड़ी स्टेफी ग्राफ के लिए साल 1988 ऐसा ही था, उस साल ग्राफ ने चारों ग्रैंड स्लैम जीतने के अलावा ओलंपिक्स खेलों में भी स्वर्ण पदक जीता था,  क्रिकेट में एक साल में चार ग्रैंड स्लैम तो नहीं होते हैं लेकिन इसके कैलेंडर ईयर की अहमियत भी कम नहीं है, कैलेंडर ईयर का मतलब है जनवरी से लेकर दिसंबर महीने तक के बीच में किसी खिलाड़ी या टीम विशेष के खेल का लेखा-जोखा, ये अलग बात है कि क्रिकेट सीज़न के मुताबिक खेला जाता है और इंग्लैंड को छोड़ दिया जाए तो ज़्यादा मुल्कों में सीज़न एक साल के आखिर में शुरू होकर अगले साल के शुरुआत तक चलते हैं!

बावजूद इसके कैलेंडर ईयर के रिकॉर्ड को क्रिकेट में ख़ासी तव्वजोह मिलती है, साल 2006 में पाकिस्तानी बल्लेबाज़ मोहमम्द यूसूफ ने 1710 रन बनाए तो सर विवियन रिचर्ड्स का 30 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा जो उन्होंने एक साल में एक बल्लेबाज़ के तौर पर सबसे ज़्यादा रन बनाए थे, सचिन तेंदुलकर भले ही अपने आदर्श रिचर्ड्स का रिकॉर्ड टेस्ट क्रिकेट में तोड़ नहीं पाये लेकिन वनडे फॉर्मेट में उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड ज़रूर बनाया जिस पर रिचर्ड्स को भी गर्व महसूस होगा, साल 1998 में तेंदुलकर ने 1894 रन बनाए जो आज तक एक रिकॉर्ड है, इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर सौरव गांगुली हैं जिन्होंने एक साल में 1767 रन बनाए हैं, तेंदुलकर ने 1998 में 65.31 की औसत और 7 अर्धशतक और 9 अर्धशतक के लिए ये सुनिश्चित कराया कि शायद उनका रिकॉर्ड भी रिचर्ड्स की रिकॉर्ड की तरह कम से कम 30 साल तक बचा रहे!

स्पेशल डेस्क,आपकी चौपाल न्यूज़! 

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