गढ़चिरौली एनकाउंटर की सफलता और नक्सल हिंसा ख़त्म

गढ़चिरौली एनकाउंटर की सफलता और नक्सल हिंसा ख़त्म

 

 

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में एक इनकाउंटर में 37 माओवादियों को मार गिराने के ऑपरेशन को नक्सलियों के खिलाफ सफल रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, यहां खुफिया इनपुट के आधार पर की गई कार्रवाइयों से नक्सलियों के दबदबे वाले इलाके घटते जा रहे हैं जबकि पहले मुठभेड़ में सुरक्षा बलों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था, ऐसे में इस सफल एनकाउंटर ने 2022 तक नक्सलियों के खात्मे की जमीन तैयार कर दी है, गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस एनकाउंटर से साफ हो गया है कि सटीक खुफिया इनपुट्स के आधार पर माओवादियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई को अंजाम दिया गया,  इस दौरान खुद को न्यूनतम नुकसान पहुंचे या पूरी तरह से बचाने के लिए सभी ऐहतियात बरते गए, गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘महाराष्ट्र पुलिस के C-60 दस्ते और CRPF ने दिखाया कि कैसे आक्रामक और रक्षात्मक अप्रोच को एकसाथ अपनाया जाता है, पिछले साल मार्च-अप्रैल में एक महीने के भीतर हुए 2 हमलों में 36 CRPF जवानों की शहादत के बाद से गृह मंत्री राजनाथ सिंह इस तरह की रणनीति अपनाने पर जोर दे रहे थे!

अधिकारी ने बताया कि गढ़चिरौली की यह कार्रवाई सटीक और जबरदस्त प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आई है, खास बात यह है कि केंद्रीय बलों ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके के खतरनाक इलाकों तक अपनी पहुंच बना ली, माना जा रहा है कि यह प्लान आगे भी कायम रह सकता है, भले ही आनेवाले दिनों में कुछ चुनौतियां सामने आएं, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गढ़चिरौली की सफलता के बाद अब 7 राज्यों में 30 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों के लिए गृह मंत्रालय ‘फाइनल पुश’ के प्लान को आगे बढ़ा सकता है, अधिकारी ने आगे कहा, ‘इस उग्रवाद का 2022 तक सफाया करने की रणनीति पर काम चल रहा है,’ सूत्रों का कहना है कि राजनाथ सिंह जल्द ही प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक कर सकते हैं, एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बैठक का मकसद अधिकारियों से फीडबैक लेकर निर्णायक कार्रवाई की तैयारी है, इससे पहले ऐसी बैठक 8 मई 2017 को हुई थी, जब सिंह ने प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मुलाकात की थी और नई रणनीति ‘समाधान’ की घोषणा की थी!’

स्पेशल डेस्क,आपकी चौपाल न्यूज़!  

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