करनाल : बूढ़ा खेड़ा गांव में हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर की दरगाह पर उर्स मेले का हुआ आयोजन ।

हरियाणा के करनाल जिले में स्थित बूढ़ा खेड़ा गांव में हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर की दरगाह पर हर साल की तरह इस साल भी उर्स मेले का आयोजन किया गया ,पिछले कई दशकों से हर साल यहाँ 16 मई को उर्स मेला लगता हैं,आप इन तस्वीरों में साफ़ देख सकते हैं कि चारों ओर लाइटों दवारा दरगाह को सजाया गया हैं ,मेला भी लगा ,जोहर झंडे की रस्म भी अदा की गई ओर बाबा की देहलीज़ पर पहुंचने वाले हर एक मुरीद में एक अलग ही आस्था का भाव देखने को मिला,हजारों जायरीन एक जुलूस के रूप में गाजे बाजे के साथ हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर की दरगाह पर अपनी मन्नते पूरी कराने के लिए चद्दरों का नजराना लेकर पहुंचे ,सैकड़ों जायरीनों का जुलूस जब सड़कों से गुजर रहा था तो नजारा वाकई देखने लायक था ,हर तरफ आस्था और भक्ति का समागम लगा हुआ था।

हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर की दरगाह में देश विदेश से आए सैकड़ों जायरीन अपनी-अपनी चद्दरों के नजराने को हाथों में लिए बाबा की दरगाह पर पहुंचे ,इस अवसर पर कव्वाली गायकों ने हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर जी के सम्मान में कव्वालियां गाकर समा बांध दिया, दरगाह के मुख्य द्वार पर जुलूस का स्वागत किया तथा मुरीदों द्वारा लाई गई चद्दरें हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर के हुजरे में अर्पित की गई, रस्मे चदर के बाद दूर दूर से आए हुए मुरीदों ने माथा टेक हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर के आशीर्वाद का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ  ,यहाँ मशहूर कव्वालों ने अपने कलाम पेश कियें और देर रात तक समां बांधा और हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर की भक्ति में खोकर मुरीद खुशी से झूमने लगे ,बड़ी तादाद में भंडारे का आयोजन भी यहाँ किया गया था ,

इतिहास :

हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर की दरगाह के बारे में बताया गया हैं कि ऐसा कहा जाता हैं कि हज़रत बाबा बू अली शाह मस्त कलंदर ने करनाल में बूढ़ा खेड़ा में पानी के तालाब में खड़े होकर 36 साल तक इबादत की थी जिसके बाद उन्होंने “बु-अली-शाह कलंदर ” की उपाधि हासिल की इस रुतबा को प्राप्त करने के बाद, कई सूफी संत बु-अली-शाह कलंदर को देखने आए,माना जाता है कि भक्ति और सेवा के कई सालों बाद बु-अली-शाह कलकंदर अपने सभी भक्तों के सामने आकाश में गायब हो गए थे।

पिछले कई दशकों से राजपूत परिवार के लोग इस दरगाह पर गद्दी नसीम थे : लक्ष्मण सिंह राणा लगभग 1951 तक इस दरगाह में गद्दी नसीम रहे उनके बाद उनके 3 नाती (बेटी का बेटा) जिनमे  कृष्ण सिंह राणा 1976 तक , उनके बाद ओम प्रकाश राणा 2010 तक और उनके बाद सबसे छोटे भाई तेजवीर राणा 2014 तक इस दरगाह में गद्दी नसीम रहे ।

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