ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष के पूजन का क्या हैं पौराणिक महत्व।

ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहते हैं, इस बार पूर्णिमा तिथि 28 मई शाम 8.40 बजे से शुरू हुई जो 29 मई को शाम 7.49 बजे तक रहेगी,ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन महिलाएं व्रत रखती हैं ,ज्येष्ठ महीने में आने वाली पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा या वट सावित्री भी कहा जाता है, इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सुहाग और सौभाग्य की कामना करती हैं।
भारत के कुछ राज्यों जैसे कि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के राज्यों में ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही वट सावित्री का त्योहार मनाया जाता है, पुराणों में ऐसा बताया जाता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास होता है, इसके मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में महादेव का वास होता है, इसलिए भी इसका महत्व बढ़ जाता है।
वट वृक्ष को एक ओर शिव का रूप माना गया है तो दूसरी ओर पद्म पुराण में इसे भगवान विष्णु का अवतार कहा गया है, अतः सौभाग्यवती महिलाएं ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं, जिसे वट सावित्री व्रत कहते हैं,इस लिहाज से वट का हमारे देश की संस्कृति और धर्म से गहरा नाता है।
इस दिन महिलाएं वट की पूजा व उसकी परिक्रमा संतान कामना और सुख-शांति के लिए भी करती हैं। इस दिन वटवृक्ष को जल से सींचकर उसमें सूत लपेटते हुए उसकी 108 बार परिक्रमा की जाती है। पुराणों में लिखा है कि वटवृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में महादेव का वास होता है,इस प्रकार इस पवित्र वृक्ष में सृष्टि के सृजन, पालन और संहार करने वाले त्रिदेवों की दिव्य ऊर्जा का अक्षय भंडार मौजूद है। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री पूर्णिमा के दिन पूजा करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। कुछ क्षेत्रों में ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है जो कि वट सावित्री व्रत के समान ही होता है।
धार्मिक दृष्टि से तो वट का महत्व है ही, चिकित्सा की दृष्टि से भी बरगद बहुत उपयोगी है। प्राचीन ग्रंथ वृक्षायुर्वेद में बताया गया है कि बरगद का पेड़ लगाने वाला व्यक्ति शिव धाम को प्राप्त होता है। आयुर्वेदिक मत से वट वृक्ष के सभी हिस्से कसैले, मधुर, शीतल तथा आंतों का संकुचन करने वाले होते हैं। कफ, पित्त आदि विकार को नष्ट करने के लिए इसका प्रयोग होता है। वमन, ज्वर, मूर्च्छा आदि में इसका प्रयोग लाभदायक है,इस दिन किसी योग्य ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा देने से पुण्‍यफल प्राप्त होता है तथा प्रसाद में चने व गुड़ का वितरण करने का महत्व है।

क्या हैं महत्व ?

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा का खास महत्व है,खासतौर से ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा को विशेष फलदायी माना जाता है,इस दिन किया गया गंगा स्नान और दान बड़ा पुण्य देता है,इसका बहुत अधिक महत्व है, प्रचलित मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान कर जरूरतमंद को दान करने से सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं,स्कंद पुराण में ज्येष्ठ पूर्णिमा को ही वट सावित्री के रूप में बताया गया है, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही अमरनाथ की यात्रा के लिये गंगाजल लेकर भक्त अपना सफर शुरू करते हैं

मुहूर्त:

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि (अधिक मास) – 29 मई 2018

पूर्णिमा तिथि आरंभ – शाम 8:41 बजे से (28 मई 2018)

पूर्णिमा तिथि समाप्त – 7 :49 बजे तक (29 मई 2018)

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