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ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शनिवार 23 जून 2018 को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी | Aapki Chopal

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शनिवार 23 जून 2018 को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शनिवार 23 जून 2018 को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी

आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शनिवार 23 जून 2018 को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी, हर साल 24 एकादशी होता है, लेकिन जिस वर्ष पुरुषोत्तम मास यानि मलमास पड़ता है उस साल 26 एकादशी होता है, इस वर्ष 2018 में पुरुषोत्तम मास होने के वजह से 26 एकादशी होंगी।

इन 26 एकादशियों में निर्जला एकादशी विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है, इसे पाण्डव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, निर्जला एकादशी व्रत एक दिन पूर्व से यानि दशमी तिथि के दिन से ही नियमों का पालन करना चाहिए।
आपको बता दें कि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है,इसस दिन दान-पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्व है,एकादशी व्रत मुख्य रूप से सृष्टि के संघचालक श्री भगवान विष्णुजी के निमित्त किया जाता है,इस दिन स्नान के बाद ‘ऊँ नमो बासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए,ऐसा माना जाता हैं कि निर्जला एकादशी के दिन व्रत रखने के साथ ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का 108 बार जप करने से अक्षय पुण्य मिलता हैं ।

 

एकादशी का समय

23 जून को रात 3 बजकर 19 मिनट पर शुरू और
24 जून 2018 को रात 3 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा ।

पूजन विधि : 

” एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन का त्याग किया जाता है,इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है, इस दिन सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें,ओम नमो भगवते वासुदेवायः मंत्र का जाप करें,इस दिन व्रत करने वालों को चाहिए कि वह जल से कलश भरें व सफेद वस्त्र को उस पर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें,इस दिन कलश और गौ दान का विशेष महत्व है। ”

24 घण्टे बिना अन्न-जल के संयमित रहकर दूसरे दिन द्वादशी तिथि को स्नान करने के बाद तुलसी के पत्तों से श्री भगवान विष्णुजी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए, तत्पश्चात ब्राह्मण को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करने के उपरांत श्री भगवान विष्णुजी को स्मरण करते हुये स्वंय भोजन ग्रहण करना चाहिए, ऐसा करने से व्रत पूर्ण होता है,शास्त्रोक्त मान्यतानुसार सभी पापों का नाश होता है और देवलोक में परम पद प्राप्त होता है ।

पदम् पुराणानुसार निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने से सभी तीर्थों में स्नान करने का पुण्य मिलता है, इस दिन जो धर्मप्रायणी दान करता है, वो सम्सत पापों का नाश करते हुए देवलोक में परम् पद को प्राप्त करता है।इस बार निर्जला एकादशी 23 जून 2018 को पड़ रहा है,ऐसा माना जाता है कि इस एक एकदाशी के व्रत से 23 एकादशियों के व्रत का फल मिलता है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की ‘निर्जला एकादशी’ सभी एकादशियों में सबसे सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।

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