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राष्ट्रपति ने 29वें महालेखाकार सम्मेलन का उद्घाटन किया। | Aapki Chopal

राष्ट्रपति ने 29वें महालेखाकार सम्मेलन का उद्घाटन किया।

राष्ट्रपति ने 29वें महालेखाकार सम्मेलन का उद्घाटन किया।

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने बुधवार को नई दिल्ली में 29 वें महालेखाकार सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि 29 वां महालेखाकार सम्मेलन जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने के हमारे मिशन को आगे बढ़ाने की जरूरतों का पता लगाने के लिए आत्मविश्लेषण और विचार विमर्श करने हेतु एक उचित अवसर है। इस साल के सम्मेलन का विषय है “डिजिटल युग में लेखापरीक्षा और लेखाप्रणाली”। जब सरकार डिजिटल भारत को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ी प्रगति कर रही हो तो ऐसे समय में यह सम्मेलन बेहद प्रासांगिक है।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता दर्शायी की नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) संस्थान एक डेटा प्रबंधन नीति के साथ आगे आया है और अपने लेखापरीक्षा कार्य में डाटा विश्लेषण का अधिक से अधिक उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि डाटा परीक्षण तकनीकियों के उपयोग से सीएजी न केवल वर्तमान के लिए पूरी पहचान करने में मदद कर सकता है बल्कि पूर्वानुमान प्रदान करने में भी सहायता कर सकता है। डिजिटल अर्थव्यवस्था में फैले डाटा के प्रबंधन और जांच के लिए उपयुक्त व्यवस्था के साथ सीएजी लंबी अवधि के रूझानों और अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे उभरते हुए मुद्दों का पूर्वानुमान लगाने के लिए तैयार है। इन पर कानून बनाने वालों और कार्यकारियों द्वारा ध्यान दिये जाने की जरूरत है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लेखापरीक्षा अपने आप में कार्य की समाप्ति नहीं है, बल्कि यह सरकारों को बेहतर काम करने के योग्य बनाने का माध्यम है। हमें उत्पादन की तुलना में कार्यक्रम मूल्य के अधिक सार्थक प्रयासों के रूप में निष्कर्षों पर अधिक जोर देना चाहिए। सीएजी यह विचार कर सकता है कि वह किस प्रकार एक संगठन के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए निष्कर्षों की पहचान, समझ और माप कर सकता है। कार्यक्रम प्रभावशीलता का ऐसा अध्ययन नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा वरदान सिद्ध होगा। ऐसे अध्ययन में प्रेरणा और परिप्रेक्ष्य समझने के लिए कार्योन्वयन एजेंसियों के साथ विचार विमर्श को भी शामिल किया जाना चाहिए। सीएजी एक संस्थान के रूप में स्थानीय नागरिकों और राज्य की लेखा परीक्षा सम्मितियों को प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, दिशानिर्देश तैयार करने मानदण्ड विकसित करने, कार्यप्रणाली तैयार करने और लेखा परीक्षा तैयार करने के बारे में सलाह देने के कार्य में भागीदारी कर सकता है।

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