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श्रीपद नाइक गोवा में 23 से 25 जनवरी, 2019 तक आयोजित होने वाले दूसरी विश्व एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी 2019 का उद्घाटन करेंगे | Aapki Chopal

श्रीपद नाइक गोवा में 23 से 25 जनवरी, 2019 तक आयोजित होने वाले दूसरी विश्व एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी 2019 का उद्घाटन करेंगे

श्रीपद नाइक गोवा में 23 से 25 जनवरी, 2019 तक आयोजित होने वाले दूसरी विश्व एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी 2019 का उद्घाटन करेंगे

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येसो नाइक होम्योपैथिक चिकित्सा उत्पादों के विनियमन और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए गोवा में 23 से 25 जनवरी, 2019 तक चलने वाली द्वितीय विश्व एकीकृत चिकित्सा संगोष्ठी, 2019 का उद्घाटन करेंगे। इस संगोष्ठी का आयोजन आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के द्वारा किया जा रहा हैं। होम्योपैथिक/पारंपरिक दवाओं के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय दवा नियामक देशों जैसे फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम, स्पेन, रूस, ब्राजील, क्यूबा, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड, मलेशिया, ओमान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और नेपाल आदि के इसमें भाग लेने की उम्मीद है।
संगोष्ठी के दौरान विनियामक सहयोग, न्यूनतम विनियामक और कानूनी मानकों पर विचार, सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को आगे बढ़ाना, मानकीकरण के लिए नियामक प्रवृत्ति और जटिलता को कम करना, होम्योपैथी को विशिष्ट समग्र चिकित्सा प्रणाली और पशु चिकित्सा होम्योपैथी के रूप में मान्यता देना जैसे विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
होम्योपैथिक औषधीय उत्पादों का विनियमन दुनिया भर में अत्यधिक परिवर्तनशील है जो राष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यधिक उन्नत है। रोगियों और वैश्विक बाजारों के लिए विनियामक सहयोग और सामंजस्य के संभावित लाभ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अत्यधिक भिन्न राष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण केवल पूर्व राष्ट्रीय सहयोग ही धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
विभिन्न नियामक आवश्यकताओं के बीच एक दूरी बनी हुई है जिसके कारण सामंजस्य और मानकीकरण को बनाते हुए एक तरफ जटिलता को कम करने की आवश्यकता है तो वहीं दूसरी ओर एक बहुलतावादी नियामक प्रणाली की आवश्यकता है, जो एक समग्र, रोगी-केंद्रित चिकित्सा प्रणाली के रूप में होम्योपैथी की विशिष्टताओं का सम्मान करती हो।
इस संगोष्ठी के दौरान सहक्रियात्मक आधार पर वैश्विक सहयोग के साथ द्विपक्षीय/ बहुपक्षीय सहयोग पर चर्चा की जाएगी साथ ही संभावित लाभों और नुकसान का भी आकंलन किया जाएगा।
रोगियों और स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं द्वारा दुनिया भर में होम्योपैथिक उत्पादों की बढ़ती मांग को एक ऐसे उचित नियामक ढांचे के द्वारा रेखांकित किये जाने की आवश्यकता है जो न सिर्फ राष्ट्रीय संदर्भों का सम्मान करते है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनुभवों और सहयोग से लाभान्वित होते हैं।
इस संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुख हितधारकों और विचारकों में दुनिया भर के नियामक, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय होम्योपैथिक दवा कंपनियां, विभिन्न देशों के फार्माकोपिया समिति के प्रतिनिधि, संबंधित विशेषज्ञों के साथ वैज्ञानिक विशेषज्ञ और प्रमुख होम्योपैथिक संगठनों के अध्यक्ष शामिल हो रहे हैं।

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