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होलिका पूजन इस विधि से करें ,देखें शुभ मुहूर्त । | Aapki Chopal

होलिका पूजन इस विधि से करें ,देखें शुभ मुहूर्त ।

21 मार्च को पूरे देश में होली मनाई जाएगी, इससे पहले 20 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा,इसे छोटी होली और होलिका दीपक भी कहते हैं,बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है,पहले होली की घर में पूजा कर चौराहों पर होलिका को जलाया जाता है फिर अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है,वहीं, मथुरा के बरसाना में हफ्तों पहले ही होली का पर्व शुरू हो जाता है,15 मार्च को बरसाना में लड्डू होली खेली गई,इसके बाद लट्ठमार होली का आयोजन होगा।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाता है,ज्योतिष के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा रहित प्रदोष काल में होली दहन को श्रेष्ठ माना गया है,होलिका पूजा और दहन में परिक्रमा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है,मान्यता है कि परिक्रमा करते हुए अगर अपनी इच्छा कह दी जाए तो वो सच हो जाती है,ऐसा भी माना जाता है कि होलिका दहन के दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए, होली की बची हुई अग्नि और भस्म को अगले दिन सुबह अपने घर ले जाने से सभी नकारात्मक उर्जा दूर हो जाती है।

होलिका दहन का सही मुहूर्त-

होलिका दहन मुहूर्त- 21:05 से 11:31 तक

भद्रा पूंछ- 17:23 से 18:24 तक

भद्रा मुख- 18:24 से 20:07 तक

रंगवाली होली- 21 मार्च को खेली जाएगी

पूर्णिमा तिथि आरंभ- 10:44 (20 मार्च)

पूर्णिमा तिथि समाप्त- 07:12 (21 मार्च)

होलिका पूजा की सामग्री :
गोबर से बनी होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं, माला, रोली, फूल, कच्चा सूत, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, पांच या सात प्रकार के अनाज जैसे नए गेहूं और अन्य फसलों की बालियां, एक लोटा जल, बड़ी-फुलौरी, मीठे पकवान, मिठाइयां और फल।

होलिका दहन कैसे करें:

होलिका दहन के स्थान को पहले गंगाजल से शुद्ध करें।

होलिका डंडा बीच में रखें. भक्त प्रहलाद का प्रतीक एक डंडा होता है।

डंडे के चारों तरफ पहले चन्दन लकड़ी डालें।

इसके बाद सामान्य लकड़ियां, उपले और घास चढ़ाएं।

कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें।

होलिका दहन में पहले श्री गणेश, हनुमान जी ,शीतला माता  और  भैरव जी की पूजा करें।
अग्नि में रोली, पुष्प, चावल, साबूत मूंग, हरे चने, पापड़, नारियल आदि चीजें चढ़ाएं।
चारों तरफ सूखे उपले, सूखी लकड़ी, सूखी घास रखें. इसके बाद अग्नि जलाएं और होलिका दहन करें।

मन्त्र -ॐ प्रह्लादये नमः बोलकर परिक्रमा करें। 

होलिका की अग्नि में क्या अर्पित करें:

– अच्छे स्वास्थ्य के लिए- होलिका की अग्नि में काले तिल के दाने अर्पित करें।

– बीमारी से मुक्ति के लिए- हरी इलाइची और कपूर अर्पित करें।

– धन लाभ के लिए- चन्दन की लकड़ी अर्पित करें।

– रोजगार के लिए- पीली सरसों अर्पित करें।

– विवाह और वैवाहिक समस्याओं के लिए- हवन सामग्री अर्पित करें।

– नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए- काली सरसों अर्पित करें।

होलिका दहन की परंपरा :
भारतीय नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पहली तिथि को शुरू होता है, इसके आगमन के पूर्व पुराने संवत्सर को विदाई दी जाती है,पुराने संवत को समाप्त करने के लिए होलिका दहन किया जाता है,इसे संवत जलाना भी कहते हैं,होलिका दहन में किसी वृक्ष कि शाखा को जमीन के अंदर डाला जाता है, चारों तरफ से लकड़ियां, उपलों से घेर कर निश्चित मुहूर्त में जलाया जाता है,इसमें गोबर के उपले, गेंहू की नई बालियां और उबटन जलाया जाता है, ताकि वर्ष भर व्यक्ति को आरोग्य कि प्राप्ति हो सके और उसकी सारी बुरी बलाएं अग्नि में भस्म हो जाएं, कई जगहों पर होलिका दहन के बाद उसकी राख को घर में लाकर उससे तिलक करने की परंपरा भी है।
शिव-पार्वती की होली
पौराणिक कथा के अनुसार हिमालय पुत्री मां पार्वती ने शिव जी तपस्या भंग करने की योजना बनाई,इसके लिए पार्वती जी ने कामदेव की सहायता ली,कामदेव ने प्रेम बाण चलाकर भगवान शिव की तपस्या को भंग कर दिया लेकिन इस बात से शिव जी बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोल दी,उनकी इस क्रोध की ज्वाला में कामदेव का शरीर भस्म हो गया लेकिन प्रेम बाण ने अपना असर दिखाया और शिव जी को मां पार्वती को देखते ही उनसे प्यार हुआ और उन्हें अपनी पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया, होली की आग को प्रेम का प्रतीम मानकर यह पर्व मनाया जाने लगा।
होलिका दहन की कहानी
हिरण्यकशिपु के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के भक्त थे लेकिन हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु का घोर विरोधी था,हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने की कई बार कोशिश की,कहा जाता है उसने प्रहलाद को मारने के लिये बहन होलिका का सहारा लिया था, होलिका को आग में ना जलने का वरदान मिला था, इस कारण होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गई थी लेकिन श्री विष्णु ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका आग्नि में भस्म हो गई, तभी से होलिका दहन की प्रथा शुरू हो गई।

होलिका दहन के लाभ-
– इस दिन मन की तमाम समस्याओं का निवारण हो सकता है, कई बीमारियों और विरोधियों की समस्या से निजात मिल सकती है।

– आर्थिक बाधाओं से राहत मिल सकती है।

– इस दिन आसानी से ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

– अलग-अलग चीज़ों को अग्नि में डालकर अपनी बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं।

राधा-कृष्ण की होली
हिंदु धर्म में होली की सबसे प्रचलित कथा भगवान कृष्ण और राधा रानी की है,इस कथा में राक्षसी पूतना एक सुंदर स्त्री का रूप धारण कर बालक कृष्ण के पास जाती है और उन्हें जहरीला दूध पिलाने की कोशिश करती हैं लेकिन कृष्ण उसको मारने में सफल रहते हैं,पूतना का देह गायब हो जाता है और बाल कृष्ण को जीवित देख सभी गांव वालों में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है फिर सब मिलकर पूतना का पुतला बनाकर जलाते हैं,इस बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में होली मनाई जाती है। 

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