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पीएम मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ थे एक चुनाव आयुक्त

पीएम मोदी को क्लीन चिट देने के खिलाफ थे एक चुनाव आयुक्त,जी हाँ आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने बीते तीन दिनों में प्रधानमंत्री के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों को लेकर कांग्रेस की शिकायतों पर अपना फैसला दिया है। 


क्या हैं मामला ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महाराष्ट्र में पिछले महीने दिये गए उनके दो भाषणों को लेकर क्लीन चिट देने के मामले पर चुनाव आयोग में ही दो फाड़ हो गया था,चुनाव आयोग ने पीएम मोदी को क्लीन चिट दी थी लेकिन जानकारी के मुताबिक दो में से एक चुनाव आयुक्त ने इस फैसले पर अपनी असहमति जताई थी, इस पूरे मामले से जुड़े उच्च सूत्रों ने यह जानकारी दी है,सूत्रों के अनुसार एक चुनाव आयुक्त ने एक अप्रैल को वर्धा के भाषण को लेकर प्रधानमंत्री को क्लीन चिट के आयोग के फैसले पर असहमति जताई थी,इस भाषण में मोदी ने कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी पर अल्पसंख्यक बहुल वायानाड सीट से चुनाव लड़ने को लेकर निशाना साधा था।   

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो और चुनावी भाषणों के मामले में क्‍लीनचिट दे दी,आयोग ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वाराणसी में अपने भाषण में सशस्त्र बलों पर उसके परामर्श या आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया,आयोग ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में मोदी की टिप्पणियों में कुछ भी गलत नहीं पाया जहां उन्होंने कथित तौर पर कांग्रेस को ‘डूबता टाइटैनिक जहाज’ बताया था,इसके साथ ही चुनाव आयोग ने मोदी के खिलाफ पांच शिकायतों पर निर्णय ले लिया है और इन सभी मामलों में उन्हें क्लीनचिट दी,आयोग ने कहा हैं कि ‘महाराष्ट्र के नांदेड़ में नरेन्द्र मोदी द्वारा दिये गये एक भाषण में आदर्श आचार संहिता और आयोग के परामर्शों के कथित उल्लंघन से जुड़ी एक शिकायत से संबंधित एक मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को महाराष्ट्र की एक विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त की गई थी,मामले की विस्तृत जांच की गई,आयोग का मानना है कि इस मामले में मौजूदा परामर्शों/प्रावधानों का उल्लंघन नहीं हुआ,नांदेड़ में अपने भाषण में मोदी ने कथित तौर पर कहा था कि कांग्रेस आज टाइटैनिक जहाज की तरह हो गई है जो डूब रहा है,जो-जो इस जहाज में बैठा था वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की तरह या तो खुद ही डूब रहा है या जान बचने के लिए छलांग लगा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ, पीएम ने 9 अप्रैल को लातूर में पहली बार वोट करने जा रहे युवाओं से बालाकोट हवाई हमले तथा पुलवामा शहीदों के नाम पर वोट की अपील की थी,पीएम पर फैसला देने वाली चुनाव आयोग की टीम मे मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा, साथी चुनाव आयुक्त अशोक लवासा तथा सुशील चंद्र शामिल थे,एक अधिकारी ने बताया कि चूंकि यह एक अर्द्ध न्यायिक निर्णय नहीं था इसलिए असहमति को दर्ज नहीं किया गया,इसमें विचार को मौखिक रूप से बैठक में रखा गया। 


पीएम मोदी के वाराणसी में 25 अप्रैल को दिये गये भाषण का जिक्र करते हुए आयोग ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश से एक विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त की गई थी,मोदी वहां लोकसभा चुनावों के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए गये थे,आयोग ने कहा कि मौजूदा परामर्शों, आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों के अनुसार इस मामले की विस्तृत जांच की गई,पूर्ण प्रतिलिपि की जांच के बाद आयोग का विचार है कि इस मामले में किसी भी तरह के मौजूदा परामर्श/प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया गया है।

मोदी ने वाराणसी की एक रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा पर बल दिया था और कहा था कि नया भारत आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देता है, बालाकोट एयर स्ट्राइक का स्पष्ट संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा था कि दुनिया ने अब आतंक के खिलाफ लड़ाई में भारत का समर्थन किया है,चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को भी प्रधानमंत्री मोदी को क्लीनचिट देते हुए कहा था कि उन्होंने राजस्थान के बाड़मेर में अपने चुनावी भाषण के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया।

पीएम मोदी ने बाड़मेर में अपनी चुनावी सभा में सशस्त्र बलों का आह्वान किया था और कहा था कि ‘भारत के परमाणु बम दिवाली के लिए इस्तेमाल किये जाने के लिए नहीं रखे गये हैं,इससे पूर्व आयोग ने वर्धा में एक अप्रैल को दिये गये प्रधानमंत्री के भाषण में कुछ भी गलत नहीं पाया था जहां उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर अल्पसंख्यक बहुल वायनाड सीट से चुनाव लड़ने के लिए निशाना साधा था।

आपको बता दें कि सभी चुनाव आयुक्त की आयोग के फैसलों में बराबर की हिस्सेदारी होती है,किसी मामले में जहां मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की राय अलग-अलग होती है तो ऐसे मामलों में फैसला बहुमत के द्वारा होता है।    

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